तमिलनाडु- एक्टर विजय की रैली में भगदड़ से 39 मौतें: 51 लोग ICU में; 9 साल की बच्ची के गुमने की खबर से बेकाबू हुई भीड़
तमिलनाडु- एक्टर विजय की रैली में भगदड़ से 39 मौतें: 51 लोग ICU में; 9 साल की बच्ची के गुमने की खबर से बेकाबू हुई भीड़
27 सितंबर 2025 की शाम को तमिलनाडु के करूर जिले में अभिनेता-राजनीतिज्ञ विजय (TVK, Tamilaga Vettri Kazhagam के नेता) की रैली “Velicham Veliyeru” के दौरान एक भीड़ फुटपाथ (stampede / crush) की घटना घटी। इस भीड़-हंगामे में अब तक की पुष्टि के अनुसार 39 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 50 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं और कई लोग ICU में भर्ती हैं।
इस रैली में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की बड़ी संख्या मौजूद थी। मृतकों में करीब 10 बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं। घटनास्थल पर दर्ज किए गए आंकड़ों के मुताबिक मृतकों में लगभग 17 महिलाएं, 12 पुरुष और 10 बच्चे शामिल हैं।
कैसे हुई घटना – घटनाक्रम व गवाहों की व्याख्या
रैली स्थल, वेलेस्वाम्यपुरम (Veluswamypuram) करूर-एरोड़ राजमार्ग पर स्थित थी। रैली में अपेक्षित से कहीं अधिक भीड़ जुटी थी, और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम पर्याप्त नहीं थे।
मुख्य त्रुटियाँ और घटक
रैली आयोजकों और सुरक्षा तंत्र द्वारा भीड़ नियंत्रण की योजना और व्यवस्था अधूरी पाई गई।
निकासी मार्ग और उपाय मार्गों पर रॉप्स, होर्डिंग्स लगाई गई थीं, जिसने भागने या बच निकलने की राहों को अवरुद्ध किया।
आयोजकों द्वारा पानी की व्यवस्था, चिकित्सा और प्राथमिक उपचार की सुविधाएँ समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई थीं। कई लोग धक्का-पुश्की में बेहोश हुए।
भीड़ में अचानक हलचल, दबाव एवं गुमनामी की अफवाहों के कारण लोग भगदड़ की ओर भागे।
अतिरिक्त घटना के रूप में, एक बेकरी की छत गिर गई, जिससे महिलाओं और बच्चों में और अधिक भय फैला।
रैली के दौरान विजय की आवाजाही में देरी हुई थी, जिसके कारण लोग लंबे समय तक इंतजार कर रहे थे और बेचैनी बढ़ी थी। जैसे ही विजय का वाहन पहुंचा और भाषण शुरू हुआ, समर्थकों ने उसके वाहन के पास पहुँचने की होड़ मचाई। इस दौरान कुछ लोग नीचे गिर पड़े और अन्य लोग उन पर गिर पड़े — इससे भय बढ़ा और भगदड़ शुरू हो गई। भीड़ नियंत्रित नहीं रह सकी और अचानक तीव्र दबाव हो गया।
खोई 9 वर्षीय बच्ची व खोजबीन
घटना के बीच सार्वजनिक घोषणा तंत्र (PA system) के माध्यम से एक 9 वर्षीय बच्ची (नाम: Ashmika) के खो जाने की सूचना दी गई। इस खोज-घोषणा से भीड़ और अधिक उन्मत्त हो गई, क्योंकि कई लोग अपने बच्चों की तलाश में भागे और जगह-जगह चिल्लाहट हुई। विजय ने स्वयं पुलिस और पार्टी कार्यकर्ताओं से उस बच्ची को खोजने की अपील की।
प्रतिक्रिया, राहत एवं सरकार की कार्रवाई
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस घटना पर गहरी पीड़ा व्यक्त की है और जांच आयोग गठित करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि “सच सामने आएगा” और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
उन्होंने मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख और घायलों को ₹1 लाख मुआवजे की घोषणा की है।
स्वास्थ्य मंत्री महा सुब्रमण्यम् (Ma Subramanian) ने अस्पतालों को “युद्ध स्तर” पर राहत और इलाज उपलब्ध कराने निर्देश दिए हैं।
विजय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनका हृदय टूटा हुआ है, और उन लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की जो इस दर्दनाक घटना में अपनी जान गंवा चुके हैं।
अन्य राजनेताओं और केंद्रीय नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “गहरा दुखद” घटना कहा।
संबंधित जिलों में हेल्पलाइन स्थापित की गयी है, आपात चिकित्सा दल और एंबुलेंस भेजी गई है, और घायलों को उस इलाके के अस्पतालों में स्थानांतरित किया जा रहा है।
चिंताएँ और आगे की चुनौतियाँ
यह घटना तमिलनाडु तथा भारत में बड़े जनसमूह कार्यक्रमों में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की कमियों पर एक गहरा प्रश्नचिह्न खड़ी करती है।
आयोजनों की योजना, प्रवेश व निकासी मार्गों की स्पष्ट संरचना, भीड़ विभाजन, आपात व्यवस्था (मेडिकल, पानी, पारदर्शी सूचना) आदि को रूपरेखा से पहले सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
रैली या कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ की संख्या से अधिक लोगों के आने पर ठोस रोक या वैकल्पिक प्रबंधन होना चाहिए।
तुरंत आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र (प्राथमिक चिकित्सा दल, एंबुलेंस, निकासी मार्ग) हर बड़े कार्यक्रम में अनिवार्य हो।
दोषियों की पहचान, जवाबदेही और बेहतर कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
यह घटना न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि लोकप्रिय नेता हों या न हों — जनसभा या रैली जैसे कार्यक्रमों में सुरक्षा प्रबंधन की अनदेखी भारी कीमत चुकाती है।
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